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Tuesday, May 24, 2016

पितृ

प्रति श्वास
प्रति स्पंदन
पिता,
करूँ मैं तव चरणन में नमन,
तव प्रेम-रचित
कृति
श्रद्धा-निहित मति,
तव स्नेह अह्लादित मम् मन ।
वेद प्रथम तव स्वर सुने,
सीखी संस्कृति-संस्कृत तुम्हीं से,
विज्ञान-ज्ञान सागर तुम्हीं,
हम मात्र सागर की लहर हैं,
द्वितीय प्रहर हो रात्रि का,
या हो कड़कती धूप पिता,
हो पाठ गणित या क्रीड़ा का,
रहे पथ-प्रदर्शक तुम सदा ।
प्रति श्वास
प्रति स्पंदन
पिता,
करूँ मैं तव चरणन में नमन ।

Tuesday, July 21, 2009

उपहार

आज सावन बरसे है यूं
ज्यों खुशियों का आवन हो,
झूम-झूम मन मयूर नाचे यूं
जैसे पी का आगमन हो ।

आज कुमुदिनी के खिलने का दिन है
कहतीं हैं नदिया की लहरें
तभी तो रिमझिम बरसे है
टूटें हैं पवनों के पहरे ।

एक लहर-सी आई है झूम के
आसमां को चूम के
पर्वतों को पार कर
आज समय की धार पर ।

यह प्रकृति का संगीत है
फूलों का मधुमय गीत है,
दिल में दबी एक आग है
या मल्हार राग है?

देखो जन्मदिन पर तुम्हारे
आए हैं मिल कर यह सारे
दिल में भर कर प्यार
लाए हैं खुशियों का उपहार ।

साल-दर-साल आएगा
यह दिन खुशियां बरसाएगा,
चलता रहेगा यह सफ़र
हाँ, समय की ताल पर ।

© 21 july 2009