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Tuesday, May 24, 2016

पितृ

प्रति श्वास
प्रति स्पंदन
पिता,
करूँ मैं तव चरणन में नमन,
तव प्रेम-रचित
कृति
श्रद्धा-निहित मति,
तव स्नेह अह्लादित मम् मन ।
वेद प्रथम तव स्वर सुने,
सीखी संस्कृति-संस्कृत तुम्हीं से,
विज्ञान-ज्ञान सागर तुम्हीं,
हम मात्र सागर की लहर हैं,
द्वितीय प्रहर हो रात्रि का,
या हो कड़कती धूप पिता,
हो पाठ गणित या क्रीड़ा का,
रहे पथ-प्रदर्शक तुम सदा ।
प्रति श्वास
प्रति स्पंदन
पिता,
करूँ मैं तव चरणन में नमन ।

Sunday, August 2, 2009

मुलाकात

जीवन की राह पर
चलते-चलते
सपने से मिले थे हम,
अपने से मिले थे हम ।
ख़ामोशी की दीवार भी थी,
एक आँसू की धार भी थी ।
कसक-सी थी बिछुड़ने की,
उम्मीद मगर थी उड़ने की ।।

वो पल
जब आत्माओं ने सच स्वीकारा था,
जो आसमां का इशारा था,
उस पल में हम खो गए थे
हाँ, तुम्हारे हो गए थे ।।

फिर कितने बरस की दूरी थी,
मिलने की आस अधूरी थी ।
तुम आते थे सपनों में,
थे अकेले हम अपनों में ।।

बस उस पल की
धरोहर है जीवन ।।


© 02 August, 2009