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Friday, December 16, 2011

आँसू

अचानक
बिन बुलाए मेहमान-से
आँखों में ठहर-से गए,
ठंड से जम गए जो
गालों के गुलाबों पे ,
लगीं जो चटकने
पलकों की कलियाँ ।

जो घड़ियां इंतज़ार की
हिमालय हुईं,
लम्हों से घंटे
घंटो से दिन जो
बनने लगे,
ख़ामोश दिल ने
कहा फिर किसी से,
आओ,
ठहरो,
बैठो
एक पल पास मेरे ।

कुछ कहो दिल की
कुछ सुनो दिल से
या आँखों को कहने दो
अपनी कहानी ।

Tuesday, July 21, 2009

उपहार

आज सावन बरसे है यूं
ज्यों खुशियों का आवन हो,
झूम-झूम मन मयूर नाचे यूं
जैसे पी का आगमन हो ।

आज कुमुदिनी के खिलने का दिन है
कहतीं हैं नदिया की लहरें
तभी तो रिमझिम बरसे है
टूटें हैं पवनों के पहरे ।

एक लहर-सी आई है झूम के
आसमां को चूम के
पर्वतों को पार कर
आज समय की धार पर ।

यह प्रकृति का संगीत है
फूलों का मधुमय गीत है,
दिल में दबी एक आग है
या मल्हार राग है?

देखो जन्मदिन पर तुम्हारे
आए हैं मिल कर यह सारे
दिल में भर कर प्यार
लाए हैं खुशियों का उपहार ।

साल-दर-साल आएगा
यह दिन खुशियां बरसाएगा,
चलता रहेगा यह सफ़र
हाँ, समय की ताल पर ।

© 21 july 2009